छोटी सी है ज़िन्दगी, तन्हा सा ये सफ़र है ।
मुसाफ़िर है हम वक़्त के, फ़िर है सो जाना ॥
बंद है जो ये दीवारे, क्युँ तू सर पटक रहा है ।
लम्हा तुझे एक मिला है, बाग़ आज आगे खिला है ॥
कुछ पल का है तमाशा, फाटक आगे खुला है ।
मंच सामने सजा है, लोग बैठे हैं टुकटुकी लगाए ॥
तमाशा कि है ख्वाहिश, आस तुझ पे लगाए ।
तेरे ऊपर है सबकी नज़रे, तमाशा तू इन्हें दिखा जा ॥
किस गम में तू खफा है, या खोया है तू किस ख़ुशी में ।
दो पल की है ये कहानी, जी ले तू इसमें ज़रा सा ॥
खोल मुस्कान का फाटक, आज सजा ले महफ़िल ।
कल अभी दूर पड़ा है, बंद अस्थिर कल्पित धरा है ॥
सपने हैं तेरे कई सारे, अरमान सब दबे पड़े है ।
मत रख उन्हें सिराहने, कल्पित कल अभी दूर धरा है ॥
रोड़े हैं कई सारे , मुश्किलें भी कड़ी है ।
पर तू है एक मुसाफ़िर , आगे तू बढ़े जा ॥
हौसला धरे तू ,सामने तू बढे जा ।
बाँध हिम्मत कि चोली ,ओढ़ विश्वास कि चादर ।
कुछ पल के लिए तू ,ख़ुद के लिए जिए जा ।
बाँध हिम्मत कि चोली ,ओढ़ विश्वास कि चादर ।
कुछ पल के लिए तू ,ख़ुद के लिए जिए जा ।
साथी मिलेंगे कई सारे , मंजिल तेरी सजेगी ॥
सेतु, दरिया जायेंगे सिमटते , तेरे करवटे बदलते ।
अगर फिर भी न तू चढ़ पाया , सो जाना हँसते हँसते ॥
छोटी सी थी ज़िन्दगी, मुसाफ़िर था तू कल का ।
लम्हा जो मिला था, जी लिया तुमने लड़ते लड़ते ॥
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